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संविधान की क्यों आवश्यकता पड़ी?(Why was there a need for a constitution?) और संविधान क्या हैं?(What are the constitution?)



 📒 संविधान की क्यों आवश्यकता पड़ी?(Why was there a need for a constitution?) और संविधान क्या हैं?(What are the constitution?)

पुराने समय में राजाओं - महाराजाओं के बनाएं, नियम चलते रहत थे। इन राजाओं के समय में एक ही अपराध के लिए अलग - अलग लोगों के किए अगल - अलग सजा का प्रावधान है । जैसे - राजा का पुत्र चोरी करे और यदि किसी अन्य व्यक्ति का पुत्र चोरी करे तो उसे दंड मिलता था । जबकि राजा के बच्चे को क्षमा कर दिया जाता था।
जब पूरे विश्व में राजाओं - महाराजों का अधिपत्य लगभग समाप्त हो रहा था और अन्य देशों की गुलामी से जब हर एक देश धीरे - धीरे स्वतंत्र हुआ, तो हर देश अपने नागरिकों में समानता लाने के लिए एक कानून का निर्माण किया । जिसे हम लोग 'संविधान' कहते है ।
संविधान में सम का अर्थ समानता और विधान का अर्थ कानून अर्थात समान हो विधान सभी के लिए।
विश्व को संविधान का विचार सबसे पहले बिट्रेन ने दिया , लेकिन बिट्रेन का संविधान अलिखित है । सबसे पहला लिखित संविधान अमेरिका का हैं।

Note- भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान हैं।

📒सरकार क्या हैं?(What is the government?)

वर्तमान में विश्व के सभी देशों के प्रशासन(अर्थात अच्छा शासन) को सरकार कहा जाता हैं। वर्तमान में संपूर्ण विश्व में सरकार का मुख्यत: तीन स्वरूप देखने को मिलता हैं।

(1.) राजतंत्र(Monarchy)

(2.) तानाशाही(Dictatorship)

(3.) लोकतंत्र(Democracy)

राजतंत्र(मोनार्ची):- इसमें राजा शासन करता है । वह भी पीढ़ी दर पीढ़ी करता रहता हैं। जैसे - इंग्लैंड 

तानाशाही(डिक्टेटरशिप):- इसमें एक व्यक्ति का शासन होता है , यह पीढ़ी दर पीढ़ी नही हो सकता हैं। जैसे - नार्थ कोरिया का किंग जोंग 

लोकतंत्र(डेमोक्रेसी):- इसमें "जनता का जनता के लिए जनता द्वारा शासन किया जाता हैं"(यह कथन अब्राहम लिंकन का है) । इसने भी शासन पीढ़ी दर पीढ़ी नही होता हैं।

Note- गणतंत्र राष्ट्र (Republic nation) : जिस देश में राष्ट्रप्रधान का निर्वाचन होता है , उसे गणतंत्र राष्ट्र कहते हैं।

📒विश्व में प्रजातंत्र का प्रकार(Type of democracy in the world)

(1.) अध्यक्षात्मक प्रजातंत्र(Presidential democracy)

(2.) संसदीय प्रजातंत्र(Parliamentary democracy)

अध्यक्षात्मक(प्रेसिडेंशियल) प्रजातंत्र :- जिस देश में अध्यक्षात्मक प्रजातंत्र होता है , वहां पर सबसे उच्च शक्ति राष्ट्रपति(president) के पास होती हैं और इन देशों में प्रधान मंत्री(Prime Minister) का पद नहीं होता है। सबसे पहले अध्यक्षात्मक प्रजातंत्र को अमेरिका ने अपनाया था।

संसदीय(पार्लियामेंट्री) प्रजातंत्र :- जिन देशों में संवैधानिक शक्ति राष्ट्रपति के पास होती हैं , लेकिन व्यवहारिक शक्ति प्रधानमंत्री के पास होती हैं। सबसे पहले संसदीय प्रजातंत्र इंग्लैंड देश ने अपनाया था।

📒प्रजातंत्र की दो प्रमुख प्रकृति(Two major nature of democracy).

(1.) एकात्मक सरकार(Unitary government)

(2.) संघात्मक सरकार(Federal government)

एकात्मक(यूनिटरी) सरकार:- इस प्रकार की प्रकृति अपनाने वाले देशों में सरकार के सत्ता , शक्ति और कार्यों का बटवारा नहीं होता है। यहां पर केंद्र व राज्य सरकार नहीं है , बल्कि इनके स्थान पर शहर होते हैं। जैसे - ग्रीनबीच , लंदन 

एकात्मक सरकार अपनाने वाला विश्व का पहला देश इंग्लैंड हैं।

संघात्मक(फेडरल) सरकार :- संघात्मक सरकार के दो माडल है। 1. USA माडल , 2. कनाडा माडल

USA माडल:- इस प्रकार की प्रजातंत्रीय प्रकृति को अपनाने वाले देशों में सरकार की सत्ता , शक्ति और कार्यों का बटवारा होता हैं। लेकिन यहां पर केंद्र व राज्य सरकार के पास बराबर शक्ति होती है। इस प्रकार की व्यवस्था सबसे USA में लागू हुई थी।

कनाडा माडल या अर्द्ध संघात्मक सरकार :- इस प्रकार की प्रजातंत्रीय प्रकृति को अपनाने वाले देशों में सरकार की सत्ता , शक्ति और कार्यों  का बटवारा होता हैं। लेकिन यहां पर केंद्र के पास , राज्य सरकार के ज्यादा शक्ति होती है। इस माडल को अर्द्ध संघात्मक सरकार का माडल भी कहते हैं। इस प्रकार की व्यवस्था सबसे कनाडा में लागू हुई थी।

📒प्रजातंत्र के स्तम्भ(Pillar) :- भारतीय संविधान के अनुसार प्रजातंत्र के 3 प्रमुख स्तंभ है । लेकिन वर्तमान में प्रेस को भी प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।

(1.) विधायिका(Legislature)

(2.) न्यायपालिका(Judiciary)

(3.)कार्यपालिका(Executive)

विधायिका (लेजिस्लेचर):- इस स्तंभ का काम कानून बनाना।

न्यायपालिका( ज्यूडिशियरी):- इस स्तंभ का काम विधायिका द्वारा बने कानून को लागू करवाना।

कार्यपालिका (एक्जीक्यूटिव):- कानून के पास होने या बने हुए ,कानून की रक्षा करना ।

Note- प्रेस(The press):-प्रेस के द्वारा हमे सही - गलत खबरों का पता लगता हैं।












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