📒भारतीय संविधान के निर्माण का इतिहास(History of the making of the Indian Constitution)
पूरे विश्व में एक समय ऐसा भी था , जब विश्व के प्रमुख देशों पर अंग्रेजों का अधिकार था। इसी में एक देश भारत भी था। अंग्रेजी सरकार , जो कि इंग्लैंड से ही भारत पर शासन को बनाए ,रखने के लिए समय समय पर एक्ट(कानून) बनाकर भारत भेजा करती थी। जिससे शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे । जो बाद में भारतीय संविधान के निर्माण में आधार का कार्य किया ।
अंग्रेजों के शासन काल के कुछ प्रमुख एक्ट , जो भारत के लिए भेजे गए थे।
1773 ई. का रेज्युलेटिंग एक्ट : भारत में इंग्लैंड सरकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी को नियंत्रित करने के लिए यह एक्ट पारित किया गया था।
(ईस्ट इण्डिया कम्पनी :जो कि भारत से व्यापार करने आयी थी , लेकिन कालांतर में वह भारत पर शासन करनें लगी थी)
इस एक्ट के कुछ प्रमुख प्रावधान :
✍️इस एक्ट(अधिनियम) द्वारा बंगाल के कलकत्ता में 1774 ई. में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई । इस न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिहास एम्पे थे।
✍️ इस एक्ट(अधिनियम) द्वारा बंगाल के गवर्नर के अन्तर्गत मुंबई और मद्रास के गवर्नर के क्षेत्रों को भी सम्मिलित कर दिया गया। इसके बाद बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल के पद के नाम से जाना जाने लगा । इस प्रकार प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड वारेन हेस्टिंग्स थे।
1833 ई. का चार्टर एक्ट : इस एक्ट के द्वारा प्रमुख कार्यों में बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया।भारत के प्रथम गवर्नर जनरल एवम् बंगाल के गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिक बने।
1858 का भारत शासन अधिनियम(एक्ट):
✍️ इस एक्ट के पारित होने से भारत पर कंपनी के शासन करने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया। भारत पर शासन का अधिकार अब केवल इंग्लैंड सरकार(क्राउन) के पास होगा।
क्राउन से तात्पर्य जब ब्रिटिश संसद में जब इंग्लैंड की महारानी का पद जुड़ जाता है , तो उसे क्राउन कहा जाता है।
✍️ इस एक्ट के द्वारा मुगल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया।
✍️ इस एक्ट के द्वारा एक नया पद भारत मंत्री का पद बनाया गया। भारत के प्रथम भारत मंत्री चार्ल्स उड़ को बनाया गया।
✍️ इस एक्ट के द्वारा भारत के गवर्नर जनरल के पद को समाप्त करके एक पद वायसराय बनाया गया। इस प्रकार भारत के अंतिम गवर्नर जनरल और प्रथम वायसराय लार्ड कैनिग था।
1909 ई. का मार्ले - मिंटो सुधार:- यह एक्ट पारित होते समय लार्ड मार्ले भारत सचिव व मिंटो भारत के वायसराय थे।
✍️ इस एक्ट के द्वारा भारत में सांप्रदायिक चुनाव कराने को कहा गया।जैसे - मुस्लिम मतदाता केवल मुस्लिम सदस्यों का ही निर्वाचन करेंगे। भारत में सांप्रदायिक चुनाव का जनक मिंटो को माना जाता हैं।
1919 ई. का मांटेग्यू- चेम्सफोर्ड सुधार: इस एक्ट के द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली शुरू की गई। (इस प्रणाली का जनक लियोनेल कार्टियस को माना जाता है)
1935 का भारत शासन अधिनियम :
✍️ इस एक्ट के द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त करके ,केंद्र में द्वैध शासन को प्रारंभ किया गया था।
✍️ इस एक्ट के पारित होने पर भारत को बर्मा से 1935 में ही अलग कर दिया गया।
✍️ इस एक्ट से भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना(1935) की गई।
📒भारतीय संविधान का निर्माता सभा : संविधान सभा(Constituent Assembly)
संविधान सभा का निर्माण कैबिनेट मिशन की शिफारिस पर जुलाई 1946 में किया गया। कैबिनेट मिशन में तीन सदस्य थे - पैथिक लारेंस (अध्यक्ष) , स्टेफर्ड क्रिप्स , AV अलेक्जेंडर।
संविधान सभा(Constituent Assembly) :
✍️ संविधान सभा का एक सदस्य 10 लाख जनसंख्या का प्रतिनिधि करता था। संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन जुलाई 1946 में किया गया। संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 थी , जिनमें 292 सदस्य ब्रिटिश प्रांतों , 4 सदस्य चीफ कमीशनरी और 93 सदस्य देशी रियासतों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
✍️ इन 389 सदस्यों में से 296 सदस्यों का निर्वाचन हुआ था। जिसमें 208 कांग्रेसी सदस्य , 73 सदस्य मुस्लिम लीग एवम् 15 अन्य दलों के सदस्य चुने गए थे
Note : चार चीफ कमीशनरी- 1.दिल्ली, 2. अजमेर 3. कुर्ग (कर्नाटका) , 4.बलूचिस्तान
✍️ भारतीय संविधान सभा में 15 महिला सदस्य भी शामिल थी , जो निम्न है - विजयलक्ष्मी पंडित , राजकुमारी अमृत कौर , सरोजनी नायडू , सुचेता कृपलानी , पूर्णिमा बनर्जी , लीला राय , जी दुर्गाबाई , हंसा मेहता , कमला चौधरी , रेणुका राय , मालती चौधरी , दक्षायणी बेलायुदन , बेगम एजाज रसूल , एनी मस्करीनी , अम्मू स्वामीनाथन।
संविधान सभा की प्रमुख बैठकें(Major meetings of Constituent Assembly):-
✍️ संविधान सभा की पहली बैठक नई दिल्ली स्थित कौंसिल चैंबर के पुस्तकालय भवन में 9 दिसंबर 1946 को हुई थीं। सभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थाई सदस्य चुना गया ।
Note- इस सभा में मुस्लिम लीग ने भाग नही लिया था।
✍️ हैदराबाद एक ऐसा देशी रियासत था, जिसके प्रतिनिधि सदस्य संविधान सभा की प्रथम बैठक में भाग नही लिया थे।
✍️ संविधान सभा की दूसरी बैठक 11 दिसंबर 1946 को दिल्ली में हुई थी। जिसमे स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद , स्थायी उपाध्यक्ष F.C. मुखर्जी और स्थाई सलाहकार B.N. राव चुना गया।
✍️ संविधान सभा की तृतीय बैठक 13 दिसंबर 1946 को दिल्ली में हुई थी। इस संविधान सभा में संविधान की उद्देशिका / प्रस्तावना / प्रियंबल को प्रस्तुत किया गया था। जिसे 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा द्वारा संविधान में जोड़ा गया।
✍️ संविधान सभा की 26 नवंबर 1949 को हुई बैठक भी काफी महत्त्वपूर्ण है। जिस दिन संविधान आंशिक रूप से लागू किया गया था। इस समय संविधान सभा में कुल 284 सदस्य उपस्थित थे।
✍️ संविधान सभ की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई , जिसमें भारत के राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चुना गया।
संविधान सभा ने संविधान निर्माण के लिए कई समिति का गठन किया , कुछ प्रमुख समितियां और उनके अध्यक्ष निम्न हैं।
समिति अध्यक्ष
*प्रारूप समिति ---------- डॉ. भीमराव अंबेडकर
*संघ शक्ति समिति ---------- पं. जवाहरलाल नेहरु
*संघीय संविधान समिति ---- पं. जवाहरलाल नेहरु
*प्रांतीय संविधान समिति ---- सरदार वल्लभभाई पटेल
*मौलिक अधिकारों व अल्पसंख्यक से संबंधित परामर्श समिति ---------- सरदार वल्लभभाई पटेल
इस समिति की दो उप - समितियां थीं -
(a) मौलिक अधिकार उप - समिति --- जे. बी. कृपलानी
(b) अल्पसंख्यक उप - समिति --- एच. सी. मुखर्जी
📒प्रारूप समिति(Drafting committee)/मसौदा समिति::
इस समिति का गठन 26 अगस्त 1947 ई. में किया गया था। इस समिति का प्रमुख कार्य संविधान का प्रारूप तैयार करना था। इसमें कुल सात सदस्य थे।
1. डॉ. भीमराव अंबेडकर(अध्यक्ष)
2. के. एम. मुंशी
3. एन. गोपाल स्वामी अय्यर
4. अल्लादी कृष्ण स्वामी अय्यर
5. बी. एम. मित्तर (बाद में इनके स्थान पर एन. माधव राव को सदस्य बनाया गया)
6. डी. पी. खेतान ( इनकी मृत्यु के बाद इनके स्थान पर टी. टी. कृष्णचारी को सदस्य बनाया गया)
📒अंतरिम सरकार के गठन की क्यों आवश्कता पड़ी?(Why there was a need for formation of an interim government?)और अंतरिम सरकार का मंत्रिमंडल(Interim Government Cabinet) ।
भारत में कैबिनेट मिशन के आगमन के समय ,भारत में अंग्रेजी सरकार का प्रशासन तंत्र विफल हो गया था। इसलिए भारत में प्रशासन व्यवस्था बिगड़े न इसके लिए 24 अगस्त 1946 में भारत की पहली अंतरिम सरकार का गठन किया गया और 2 सितंबर 1946 को अंतरिम सरकार के मंत्रियों को सपथ दिलायी गायी। इसमें मुस्लिम लीग का कोई भी सदस्य शामित नहीं था , लेकिन तीन अन्य मुस्लिम सदस्य को भी मंत्री मंडल में शामिल किया गया था। 26 अक्टूबर 1946 को मुस्लिम लीग भी अंतरिम सरकार में शामिल हो गई , जिसका उद्देश्य विभाग में रहकर पाकिस्तान की मांग करते रहना।
मंत्री विभाग
पं. जवाहर लाल नेहरु ---- विदेशी मामले और राष्ट्रमंडल
संबंध
सरदार वल्लभभाई पटेल ---- गृह मंत्रालय , सूचना और
प्रसारण मंत्रालय
सी.राजगोपालचारी ---- शिक्षा मंत्रालय
जान मथाई ---- उद्योग तथा आपूर्ति मंत्रालय
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ---- खाद्य व कृषि मंत्रालय
जगजीवन राम ---- श्रम विभाग
सरदार बलदेव सिंह ---- रक्षा मंत्रालय
सी. एच.भाभा ---- कार्य , खान , व ऊर्जा मंत्रालय
लियाकत अली खां ---- वित्त मंत्रालय
अब्दुल रब नश्तर ---- संचार विभाग
आसफ अली ---- रेलवे मंत्रालय
आई. आई.चुंदरीगर ---- वाणिज्य मंत्रालय
जोगेंद्र नाथ मंडल ---- विधि मंत्रालय
गजांतर अली खां ---- स्वाथ्य मंत्रालय
📒भारत - पाकिस्तान के बंटवारा के बाद संविधान सभा और अंतरिम सरकार में हुये परिवर्तन(Changes in the Constituent Assembly and the Interim Government after the Partition of India and Pakistan)::
✍️ 3 जून 1947 को माउंट बेटेन योजना प्रकाशित हुई , जिसमे भारत का विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया था। भारत - पाकिस्तान बटवारा के बाद संविधान सभा का पुनर्गठन किया गया। इस प्रकार पुनर्गठित संविधान सभा में कुल 324 सदस्य हो गई। इसके बाद 31 अक्टूबर 1947 को पुनर्गठित संविधान सभा की प्रथम बैठक हुई , जिसमे कुल 299 सदस्य उपस्थित थे।
✍️ भारत - पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश बनाने के बाद यह निर्णय लिया गया , कि जब तक संविधान का पूर्ण निर्माण नहीं होता तब -तक प्रशासन कार्य करने भारत ने स्वतंत्र भारत का पहला मंत्रिमंडल स्थिति किया।
मंत्री विभाग /मंत्रालय
पं. जवाहर लाल नेहरु ---- प्रधानमंत्री, विदेशी मामले ,
राष्ट्रमंडल सम्बंध व वैज्ञानिक शोध
सरदार वल्लभभाई पटेल --- गृह मंत्रालय , सूचना,प्रसारण
मंत्रालय और राज्य के मामले
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ---- खाद्य व कृषि मंत्रालय
जान मथाई ---- रेलवे व परिवहन मंत्रालय
सरदार बलदेव सिंह ---- रक्षा मंत्रालय
राजकुमारी अमृताकौर ---- स्वाथ्य मंत्रालय
डॉ. भीमराव अंबेडकर ---- विधि मंत्रालय
सी. एच.भाभा ---- वाणिज्य मंत्रालय
रफी अहमद किदवई ---- संचार विभाग
आर. के. षणमुगम शेट्टी ---- वित्त मंत्रालय
श्याम प्रसाद मुखर्जी ---- उद्योग तथा आपूर्ति मंत्रालय
वी. एन. गाडगिल ---- कार्य , खान , व ऊर्जा मंत्रालय
सविधान से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्य(Other important facts related to the constitution)
✍️ संविधान बनाने में कुल 2 वर्ष - 11 माह - 18 दिन का समय लगा था। संविधान के प्रारूप पर 144 दिन तक विचार हुआ था।
✍️ संविधान पारित करते समय कुल उपस्थित सदस्यों की संख्या 284 थीं।
✍️ संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 और अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुयी थीं।
✍️ संविधान सभा को 26 नवंबर 1949 को आंशिक रूप से या अंगीकृत या आत्मर्पत किया गया था।
✍️ मूल संविधान में 22 भाग थे , लेकिन वर्तमान में 25 भाग हैं।
✍️ मूल संविधान में 395 अनुच्छेद(Article) थे , लेकिन वर्तमान में 444 अनुच्छेद हैं।
✍️ मूल संविधान में 8 अनुसूचियां थीं , लेकिन वर्तमान में 12 अनुसूचियां हैं।
✍️ संविधान दिवस की शुरुआत 26 नवंबर 2015 से प्रारंभ की गई थी , क्योंकि संविधान निर्माता Dr. भीमराव अंबेडकर की 125 वें जन्मदिन के अवसर पर इसकी शुरुआत की गई। इसलिए संविधान दिवस हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता हैं।
📒भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble to the Indian Constitution) :
हम , भारत के लोग , भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व - सम्पन्न , समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए , तथा उसके समस्त नागरिकों को , सामाजिक , आर्थिक और राजनैतिक न्याय , विचार , अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता , प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए , तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर , 1949 ई . ( मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी , संवत् दो हजार छह विक्रमी ) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत , अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
प्रस्तावना से संबंधित अन्य महत्तवूर्ण तथ्य :
✍️ प्रस्तावना का विचार अमेरिकी संविधान से लिया गया हैं।
✍️ प्रस्तावना में मात्र एक बार संशोधन किया गया है। इसमें समाजवाद , पंथनिरपेक्षता , अखंडता नमक तीन नये शब्द 42 वॉ संविधान संशोधन 1976 में जोड़ा गया।
✍️ प्रस्तावना में स्वतंत्रता , समानता , और बंधुत्व का विचार फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित हैं।
✍️ प्रस्तावना को भारतीय संविधान की कुंजी ,भारतीय संविधान का सार और भारतीय संविधान की आत्मा भी कहते हैं।
📒संविधान के स्त्रोत(Sources of constitution)
UK/ ब्रिटेन के संविधान से :
*संसदीय प्रणाली
*एकल नागरिकता
*प्रधानमंत्री का पद
*राष्ट्रप्रधान की स्थिति
*कानून का शासन
*कानून बनाने की प्रक्रिया या विधायी प्रकिया
*मंत्रिमंडल प्रणाली
*संसदीय विशेषाधिका
*द्विसदनवाद(लोक सभा व राज्य सभा
*चुनाव में प्राप्त सर्वाधिक मताधिकार के आधार पर जीत का निर्धार
अमेरिका(USA) के संविधान से::
*प्रस्तावना
*मूल अधिका
*न्यायपालिका की स्वतंत्रता
*न्यायिक पूर्नरावलोकन (Judicial revie
*उपराष्ट्रपति का पद
*राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया
जर्मनी के संविधान से::
*आपातकालीन उपबं
*आयरलैंड के संविधान से:
*राज्य के नीति निर्देशक तत्व
*राष्ट्रपति/ उपराष्ट्रपति का निर्वाचन पद्ध
कनाडा के संविधान से::
*अर्ध संघीय व्यवस्था या मजबूत केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था
केंद्र व राज्य के बीच शक्ति का विभा
*सर्वोच्च न्यायालय का एक सहायक सहकारी न्यायाधिकरण का होना
*राज्यों में केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति
दक्षिण अफ्रीका के संविधान से::
*संविधान संशोधन प्रक्रिया
रूस के संविधान से::
*मूल कर्तव्य
*प्रस्तावना में न्यायिक आदर्श
फ्रांस के संविधान से::
*गणतंत्र प्रणाली
*प्रस्तावना में उल्लेखित स्वतंत्रता , समानता और बंधुत्व का विचार फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित है।
ऑस्ट्रेलिया के संविधान से:
*समवर्ती सूची
*संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
जापान के संविधान से:
*विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया
📒भारतीय संविधान के भाग व उनके अनुच्छेद दायरा(Part of Indian Constitution and their Article Scope):
📒संविधान के महत्वपूर्ण भागों और प्रमुख अनुच्छेदो की व्याख्या(Interpretation of important parts and articles of the constitution)
👉 भाग -1 में संघ एवम् उसके राज्यक्षेत्र का वर्णन किया गया है। यह भाग 1 से 4 अनुच्छेद तक फैला हैं।
अनुच्छेद 1: के तहत इंडिया राज्यों का एक संघ होगा।
भारत के राज्य क्षेत्र में निम्न राज्य क्षेत्र सम्मिलित होगे।
* राज्यों का राज्य क्षेत्र
* संघ का राज्य क्षेत्र
* अर्जित किया हुआ राज्य क्षेत्र
अनुच्छेद 2: के तहत संसद को यह अधिकार है, की वह नये राज्यों के प्रवेश या स्थापना कर सकती हैं।
अनुच्छेद 3: के तहत संसद नये राज्यों का निर्माण , पुराने राज्यों के नाम , क्षेत्र , आकार और सीमा में परिवर्तन कर सकती हैं।
👉भाग-2 में नागरिकता(Citizenship) का वर्णन किया गया हैं। यह अनुच्छेद 5 से 11 तक फैला हैं।
नागरिक(Citizen) : किसी देश में निवास करने वाला वह व्यक्ति , जो अपने देश और अपने देश के संविधान के प्रति पूर्ण आस्था रखता हो , वह नागरिक कहलाता हैं।
नागरिकता(Citizenship): किसी व्यक्ति को प्राप्त वह अधिकार , जो उस व्यक्ति को उसके देश की सदस्यता और उस देश के संविधान से अधिकार प्राप्त होते हो , जो की विदेशियों को नहीं मिल पाते है।
अनुच्छेद 5: के तहत, वह प्रत्येक जो संविधान के प्रारंभ(26 जनवरी1950) के समय भारत के राज्य क्षेत्र में रहते है। वह भारत के नागरिक होगे ,यदि निम्न शर्तो में से कोई भी शर्त पूरा करते हो।
* वह भारत में जन्म हो।
* उसके माता -पिता में से कोई एक भारत के राज्य क्षेत्र में जन्मा हो।
* वह व्यक्ति ,जो संविधान लागू होने से ठीक पहले कम से कम 5 वर्ष तक भारत में रहा हों।
अनुच्छेद 6: में पाकिस्तान से आने वाले व्यक्तियों को प्राप्त नागरिक अधिकार।
अनुच्छेद 7: भारत से पाकिस्तान जाने वाले व्यक्तियों से संबंधित अधिकार।
अनुच्छेद 8: भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों की नागरिकता संबंधित अधिकार।
अनुच्छेद 11: के अनुसार नागरिक संबंधी कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है। इसके लिए संसद ने नागरिक अधिनियम 1955 पारित किया था। इस नागरिक अधिनियम में नागरिकों से संबंधित निम्न प्रावधान थे।
* जन्म से नागरिकता
* वंशानुगत नागरिकता
* पंजीकरण द्वारा प्राप्त नागरिकता
* देशीकरण से प्राप्त नागरिकता
* भारतीय राज्य क्षेत्र में कोई नया राज्य क्षेत्र मिलने से उस राज्य क्षेत्र के नागरिकों को प्राप्त भारतीय नागरिकता प्राप्त होंगी।
👉 भाग 3 में मौलिक अधिकार(Fundamental Rights) का वर्णन मिलता है, जो अनुच्छेद 12 से 35 तक हैं।
मौलिक अधिकार: ऐसे अधिकार , जो मानवता को ध्यान में रखकर बनाये गाएं है , जिससे व्यक्ति का अवशोषण न हो और व्यक्ति का मानसिक , सामाजिक और नैतिक विकास हो सके।
* इसे संयुक्त राज्य अमेरिका(USA) के संविधान से लिया गया हैं।
* मूल संविधान में मौलिक अधिकार सात थे , लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978 में) के द्वारा संपति का अधिकार (Property right) को हटाकर , अब इसे अनुच्छेद 300 (a) में कानूनी अधिकार का दर्जा दिया गया हैं।
* वर्तमान के 6 प्रमुख मौलिक अधिकार निम्न हैं।
(1) समानता का अधिकार (अनु. 14 से 18 तक)
(2) स्वतंत्रता का अधिकार (अनु. 19 से 22 तक)
(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनु. 23 से 24 तक)
(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनु. 25 से 28 तक)
(5) संस्कृति और शिक्षा संबंधित अधिकार (अनु. 29 से 30 तक)
(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार (केवल अनु. 32)
*समानता का अधिकार(Right to equality) : इसके अन्तर्गत कुल 5 अनुच्छेद आते हैं।
अनुच्छेद 14 : विधि के समक्ष समानता (Equality before law) अर्थात सभी व्यक्ति के लिए एक समान कानून बनेगा और यह कानून सभी व्यक्ति पर एक समान लागू भी होगा।
अनुच्छेद 15 : धर्म , जाति , लिंग और जन्म - स्थल के आधार पर विभेद का प्रतिषेध। इसका अर्थ है की किसी व्यक्ति का धर्म , जाति , लिंग और जन्म - स्थल के आधार पर उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जायेगा।
अनुच्छेद 16 : लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता , इसका तात्पर्य यह हैं , कि सभी व्यक्ति को राज्य (देश) के अधीन नियुक्ति एवम् रोजगार में अवसर की समानता प्राप्त हैं।
अनुच्छेद 17 : अस्पृश्यता का अंत (End of untouchability) इसका आशय अस्पृश्यता (छुआ - छूत) को प्रतिबंधित किया जाए । अस्पृश्यता को एक दंडनीय अपराध माना जाता हैं।
अनुच्छेद 18 : उपाधियों का अंत(End of titles) , इसका आशय राज्य(देश) के द्वारा किसी भी प्रकार की उपाधि नही दी जाएगी परंतु शैक्षणिक और सैन्य उपाधियों दी जा सकती हैं।
* स्वतंत्रता का अधिकार(Right to freedom) : इसमें कुल 5 अनुच्छेद हैं।
अनुच्छेद 19 : इस अनुच्छेद द्वारा मूल संविधान में कुल सात अधिकार दिये गए थे , लेकिन वर्तमान में 6 अधिकार हैं (संपति के अधिकार को हटाया गया )
अनुच्छेद 19(a): वाक व अभिव्यक्ति या बोलने की स्वतंत्रता ।
अनुच्छेद 19(b): शांतिपूर्वक , बिना हथियार के सम्मेलन करने की स्वतंत्रता।
अनुच्छेद 19(c): संघ या समूह बनाने की स्वतंत्रता ।
अनुच्छेद 19(d): देश के किसी भी क्षेत्र में संचरण ( आवागमन) की स्वतंत्रता।
अनुच्छेद 19(e) : देश के किसी भी क्षेत्र में रहने और बसने की स्वतंत्रता ।
अनुच्छेद 19(g): देश के किसी भी क्षेत्र में व्यापार और जीविका चलाने की स्वतंत्रता।
Note - प्रेस की स्वतंत्रता को अनुच्छेद 19 (a) के तहत मिलती हैं।
अनुच्छेद 20 : अपराध के लिए दोष सिद्ध के संबंध में संरक्षण । इसके अन्तर्गत अपराध से संबंधित तीन प्रमुख स्वतंत्रता हैं।
(1) किसी भी व्यक्ति को अपराध के लिए वर्तमान कानून के आधार पर सजा मिलनी चाहिए और नये कानून बनाकर उसे सजा नही दी जायेगी।
(2) किसी व्यक्ति को एक अपराध के लिए केवल एक ही बार सजा मिलनी चाहिये।
(3) किसी अपराधी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध न्यायालय ने गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा ।
अनुच्छेद 21: में प्राण एवम् दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार । इस अनुच्छेद को जीवन का अधिकार भी कहते हैं। इस अनुच्छेद में कहा गया हैं , कि किसी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के बिना उसके जीवन और दैहिक(शारीरिक) स्वतंत्रता से उसे वंचित नहीं किया जा सकता हैं।
* अनुच्छेद 21(a): इस अनुच्छेद में शिक्षा का अधिकार है , जिसको 86वें संविधान संशोधन 2002 में मौलिक अधिकार बनाया गया । जिसमें 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।
अनुच्छेद 22: कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध में संरक्षण।
यदि किसी व्यक्ति को किसी कारणवश गिरफ्तार किया जाता हैं । तो उसे इसके संबंध में तीन प्रमुख स्वतंत्रता मिलती हैं।
(1) यदि किसी व्यक्ति को किसी कारणवश गिरफ्तार किया जाता हैं ,तो उस व्यक्ति को गिरफ्तार के कारण से अवगत कराया जाना चाहिए।
(2) उसे गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर उसे निकटम किसी भी न्यायालय में पेश किया जाना चाहिये।
(3) उसे अपने मन पसन्द वकील से परामर्श लेने का अधिकार।
* शोषण के विरुद्ध अधिकार (right against exploitation) : इसमें कुल दो अधिकार हैं।
अनुच्छेद 23 : इस अनुच्छेद में मानव के दुर्व्यापार ,बेगार तथा बलात श्रम का प्रतिषेध
बलात श्रम(Forced labor) : किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध कार्य करवाना ।
बेगार : किसी व्यक्ति से काम करवाकर , उसे पैसे न देना।
मानव व्यापार(Human trade) : मानव ( ख़ासकर महिलाओं , बच्चों ) की खरीद व बेच
अनुच्छेद 24 : कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषध।
14 वर्ष से कम बच्चों की आयु वाले बालकों को कारखानों एवम् संकटमय नियोजन में नहीं लगाया जा सकता हैं।
*धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to religious freedom) : इसमें कुल 4 अनुच्छेद हैं।
हमारा देश गणराज्य के साथ - साथ एक पंथ निरपेक्ष (Secular) देश हैं। पंथ निरपेक्ष से तात्पर्य देश का अपना कोई विशेष धर्म नहीं हैं। यहां सभी धर्मों को समान आदर एवम् संरक्षण प्राप्त हैं।
अनुच्छेद 25: इस अनुच्छेद में कहा गया है कि अंत:करण से , किसी भी धर्म को अबध्य रूप मानने , आचरण और उसका प्रचार - प्रसार करने की स्वतंत्रता हैं।
अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध में स्वतंत्रता।
अनुच्छेद 27: धार्मिक अभिवृद्धि के लिए कर संदाय की स्वतंत्रता।
अनुच्छेद 28: कुछ शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने की स्वतंत्रता।
*संस्कृति और शिक्षा संबंधित अधिकार(Rights related to culture and education) : इसमें 2 अनुच्छेद हैं।
अनुच्छेद 29: इस अनुच्छेद से अल्पसंख्यक वर्ग के हितों को संरक्षण प्राप्त हैं।
अनुच्छेद 30: इस अनुच्छेद के तहत अल्पसंख्यक वर्ग को यह अधिकार है, कि वह शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और उनका प्रशासन भी कर सकते हैं।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to constitutional remedies): इसका वर्णन केवल अनुच्छेद 32 में ही हैं।
अनुच्छेद 32: इस अनुच्छेद के द्वारा मौलिक अधिकारों को न्यायालय द्वारा क्रियान्वयन का अधिकार प्राप्त हैं।
✍️ इस अनुच्छेद(Article) को Dr. भीमराव अंबेडकर ने संविधान की आत्मा(soul) और ह्रदय(heart) कहा हैं।
✍️ इस अनुच्छेद के द्वारा मौलिक अधिकारों को सर्वोच्च न्यायालय रिट (Writ) जारी करके लागू करता हैं। संविधान में 5 रिट हैं , जो निम्नलिखित हैं।
(1) बंदी प्रत्येक्षिकारण (Habeas Corpus)
(2) परमादेश (Mandamus)
(3) अधिकार पृच्छा (Quo Warranto)
(4) उत्प्रेषण (Certiorari)
(5) प्रतिषेध (Prohibition)
बंदी प्रत्येक्षिकारण (हार्बर कॉर्पस): यह रिट सरकार और व्यक्ति दोनों के विरुद्ध जारी की जा सकती हैं।
परमादेश (मंडामस): जब सरकार का उच्चतर अधिकारी अपने पद का कार्य , वह सही ढंग से नहीं करता है , तो सर्वोच्च न्यायालय उसके खिलाफ परमादेश का रिट जारी करती हैं।
अधिकार पृच्छा (क्यू वारंटो) : जब कोई व्यक्ति सरकारी ऑफिस में सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से बैठा हो। तो सर्वोच्च न्यायालय उसके खिलाफ अधिकार पृच्छा का रिट जारी करती हैं।
उत्प्रेषण (सर्टियोरारी) : निचली अदालत में जब कोई मामला बहुत लंब समय से चल रहा हैं और निचली अदालत फैसला नहीं दे पा रही हैं। तो सर्वोच्च न्यायालय अधिकार पृच्छा का रिट जारी कर उस मामले को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लेती हैं।
प्रतिषेध (प्रोहिबिशन) : इस रिट के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय निचली अदालत को किसी भी मामले की सुनाई करने से रोक सकती हैं।
अनुच्छेद 33 : संसद को यह अधिकार हैं , कि वह सैन्य बलों (Military forces) , अर्द्ध सैन्य बलों (Paramilitary forces) , पुलिस आदि में कार्यरत व्यक्तियों के मूल अधिकारों कि समय सीमा को निर्धारित कर सकती हैं। जबकि यह अधिकार विधान सभा को नही हैं।
अनुच्छेद 34 : जब कभी भी देश में मार्शल लॉ (सैन्य विधि) लागू हो तो संसद को यह अधिकार है , कि मूल अधिकारों को प्रतिबंधित कर सकती हैं।
👉भाग 4 में राज्य के नीति - निर्देशक तत्व का वर्णन किया गया है ,जो अनुच्छेद 36 से 51 तक फैला हुआ हैं।
राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों का आशय , उन तत्वों से हैं , जिन्हे राज्य अपने शासन नीति को बनाने में प्रयोग करता हैं। इसका उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना। राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों को न्यायालय में चुनावती नहीं दी जा सकती हैं।
✍️ Dr. भीम राव अंबेडकर के अनुसार राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों को भारतीय संविधान की 'अनोखी विशेषता' कहा था।
*** इस भाग के कुछ प्रमुख अनुच्छेद निम्न हैं।
अनुच्छेद 38 : इस अनुच्छेद के तहत राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनायेगा।
अनुच्छेद 39 : इस अनुच्छेद के तहत राज्य द्वारा संचालित कुछ नीति निर्देशक तत्त्व का वर्णन किया गया हैं।
(1) सभी पुरुष व स्त्रियां नागरिकों के लिए जीविका के लिए पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार ।
(2) भौतिक संसाधनों का बटवारा सामूहिक हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिये।
(3) धन एवम् उत्पादन के संसाधनों का संकेंद्रन न हो सके , क्योंकि ऐसा करने से आर्थिक व्यापार का संतुलन बिगड़ सकता हैं।
(4) पुरुष व स्त्रीयों दोनो को समान कार्य के लिए समान वेतन मिलना चाहिए।
(5) पुरुष व स्त्रियों के स्वास्थ का दुरुपयोग न हो।
अनुच्छेद 39(क): राज्य अपने लोगों के लिऐ समान न्याय एवम् निशुल्क विधि सलाहकार (सरकारी वकील ) की व्यवस्था करना।
अनुच्छेद 40: इस अनुच्छेद में ग्राम पंचायतों के गठन संबंधित प्रावधान हैं।
अनुच्छेद 42: इस अनुच्छेद के तहत राज्य राज्य , काम की न्याय संगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति का उपबंध करेगा।
अनुच्छेद 43: राज्य कर्मचारियों के लिए निर्वाह मजदूरी और शिष्ट व सामाजिक जीवन स्तर को बढ़ाने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 44: राज्य , देश के समस्त नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता (Uniform Civil Code) को बनाएं रखने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 45: राज्य , 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा व्यवस्था का प्रबंध करेगा।
अनुच्छेद 48: राज्य , कृषि और पशुपालन का संगठन करेगा।
अनुच्छेद 48(क): राज्य , पर्यावरण (environment) का संरक्षण व संवर्द्धन और वन व वन्य जीव की रक्षा करने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 49: राज्य , राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों (Monuments) , स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण करेगा।
अनुच्छेद 50: लोक सेवा के लिए राज्य कार्यपालिका से न्यायपालिका को पृथक्करण करेगा।
अनुच्छेद 51: राज्य , अंतराष्ट्रीय शांति एवम् सुरक्षा में अभिवृद्धि करने का प्रयास करेगा।
👉 भाग 4(क) में मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) का वर्णन मिलता हैं। इसका दायरा केवल अनुच्छेद 51 (क) तक ही सीमित हैं।
मूल संविधान में मौलिक कर्तव्य नहीं था , इसको 42वें संविधान संशोधन 1976 में सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़ा गया है। उस समय मौलिक कर्तव्य की संख्या 10 थी , लेकिन 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा इसकी संख्या बढ़कर 11 हो गई हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए 11 मौलिक कर्तव्य निम्नलिखित हैं।
(1) संविधान का पालन करे और , उसके आदर्शों , संस्थाओं , राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
(2) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने वालें उच्च आदर्शों को ह्रदय में संजोए रखना और उनका पालन करना।
(3) भारत की संप्रभुता , एकता और अखंडता की रक्षा करे।
(4) हमेशा देश की रक्षा करना और आवाह्न किए जानें पर राष्ट्र की सेवा करना।
(5) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करे , जिससे वें लोगो धर्म , भाषा , वर्ग और प्रदेश आधारित भेदभाव का त्याग कर सके। इसी प्रथाओं का त्याग करे , जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हो।
(6) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
(7) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवम् उसका संवर्द्धन करे और सभी प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।
(8) वैज्ञानिक दृष्टिकोण , मानवता और ज्ञानर्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
(9) सार्वजनिक संपति की सुरक्षा करे और अहिंसा का पालन करे।(10) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का निरंतर प्रयास करे , जिसे राष्ट्र का निरंतर विकास होता रहें।
(11) माता - पिता या संरक्षण द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना।
Note - 11वा मौलिक कर्तव्य 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना ,इसको 86वें संविधान संशोधन 2002 में जोड़ा गया हैं।
👉भाग 5 में संघ (Union) का वर्णन किया गया हैं। यह अनुच्छेद 52 से अनुच्छेद 151 तक फैला हैं।
इस भाग में संघ की कार्यपालिका (Union executive) का वर्णन अनुच्छेद 52 से अनुच्छेद 123 तक हैै। और इसी भाग में भारत की न्यायपालिका (Judiciary) का भी वर्णन किया गया , जो अनुच्छेद 124 से 147 तक हैं।
संघ की कार्यपालिका में आने वाले प्रमुख पदाधिकारी -
* राष्ट्रपति (President)
* उपराष्ट्रपति (Vice President)
* प्रधान मंत्री (Prime Minister) और उनका मंत्री परिषद (Council of Ministers)
* महान्यायवादी (Attorney General)
* भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India)
अनुच्छेद 52: इस अनुच्छेद के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति (President) होगा।
अनुच्छेद 53: के अनुसार संघ की कार्यपालिका की शक्ती राष्ट्रपति में निहित होगी (अर्थात कार्यपालिका का प्रधान (Executive head))
अनुच्छेद 54: के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन (चुनाव) - निर्वाचन मंडल द्वारा होगा।
निर्वाचन मंडल में - संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य और 70वें संविधान संशोधन 1992 के तहत दो केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली और पुदुच्चेरी) के विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।
अनुच्छेद 55: इस अनुच्छेद में राष्ट्रपति के निर्वाचन रीति (Election method) का वर्णन किया गया है।
* भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन रीति , अनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति(Proportional representation method) के एकल संक्रमणी मत पद्धति से गुप्त मतदान प्रणाली द्वारा होता हैं।
अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति की पदावधि (Presidential term)
*अनुच्छेद 56(1): राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण से 5 वर्ष तक होगा।
* अनुच्छेद 56(क): कार्यकाल से पहले राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को देता हैं।
अनुच्छेद 57: राष्ट्रपति पद के लिए पुन:निर्वाचन के लिए पात्रता
* कोई भी व्यक्ति , राष्ट्रपति पद पर जितनी भी बार चाहे निर्वाचित हो सकता। संविधान में इसकी कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई हैं।
अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं।
कोई भी व्यक्ति को राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए निम्न अर्हताएं होनी चाहिए।
* वह भारत का नागरिक हो।
* वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हों।
* वह लोक सभा व राज्य सभा में निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
* भारत सरकार एवम् राज्यरकार के अधीन या किसी के नियंत्रण में स्थानीय संस्था में लाभ के पद में न हों।
अनुच्छेद 59:राष्ट्रपति पद के लिए शर्तो का उल्लेख किया गया है।
* वह संसद के किसी भी सदन या राज्य विधायिका का सदस्य नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा कोई व्यक्ति निर्वाचित होता है , तो उसे पद ग्रहण से पहले उस पद से त्यागपत्र देना होगा।
* राष्ट्रपति लाभ का कोई अन्य पद नहीं धारण करेगा।
* राष्ट्रपति को बिना किराये दिए , शासकीय आवास मिलेगा और पदावधी के दौरान राष्ट्रपति के भत्ते काम नहीं किए जायेगे।
अनुच्छेद 60: इस अनुच्छेद में राष्ट्रपति को सपथ (Oath) संबंधित प्रावधान है।
* राष्ट्रपति को सपथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या इनकी अनुपस्थति में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश सपथ दिलायेगे।
अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) का प्रावधान।
* राष्ट्रपति द्वारा संविधान का अतिक्रमण करने पर , उसके खिलाफ़ महाभियोग लाया जाता हैं।
* महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता हैं। इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति को 14 दी पहले लिखित रूप में देना होगा तथा इस प्रस्ताव को जिस सदन ने राष्ट्रपति के पास पेश किया है , उस सदन के एक चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर उस लिखित पत्र होने चाहिएं। इस महाभियोग प्रस्ताव को एक सदन में दो तिहाई बहुमत से पास होने के बाद इस प्रस्ताव को दूसरे सदन में भेजा जाता हैं , जहां राष्ट्रपति स्वयं या राष्ट्रपति का कोई प्रतिनिधि जा कर अपना स्पष्टीकरण दे सकता हैं। यदि दूसरे सदन ने भी से दो तिहाई बहुमत से पास कर दिया हैं , तो राष्ट्रपति को अपना पद छोड़ना होगा।
@ अभी तक भारत के किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं लगा हैं।
@ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को हटाने का प्रावधान भी महाभियोग ही हैं।
अनुच्छेद 63: यह अनुच्छेद के तहत भारत का एक उपराष्ट्रपति (Vice President) होगा।
अनुच्छेद 64: इस अनुच्छेद के तहत उपराष्ट्रपति , राज्यसभा का पदेन सभापति (Chairman) होगा।
Note- उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता हैं , अतः इनको मतदान का अधिकार नहीं है , लेकिन सभापति के रूप में निर्णायक मत देने का अधिकार उसे प्राप्त हैं।
अनुच्छेद 65: उपराष्ट्रपति , राष्ट्रपति की भूमिका में
* इस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति की मृत्यु , पदत्याग , एवम् पद से हट जाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति को , राष्ट्रपति के रूप में पूर्ण शक्ति के साथ कार्य करने का अधिकार मिल जायेगा। उपराष्ट्रपति यह भूमिका तब - तक निभाता हैं , जब तक नये राष्ट्रपति का चुनाव न हो जाये। चुनाव 6 महीने के अंदर करा लेना आवश्यक हैं।
* जब उपराष्ट्रपति , राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता हैं , तो वह राज्य सभा के सभापति पद पर कार्य नही कर सकता हैं।
अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का निर्वाचन।
* निर्वाचन मंडल में - संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचकगण के सदस्य और संसद के मनोनित सदस्यों के द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति(Proportional representation method) के एकल संक्रमणी मत पद्धति से गुप्त मतदान प्रणाली द्वारा होता हैं। लेकिन इनके निर्वाचन में राज्य के विधान सभा से सदस्य को शामिल किया जाता हैं।
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता हैं , अतः इनको मतदान का अधिकार नहीं है , लेकिन सभापति के रूप में निर्णायक मत देने का अधिकार उसे प्राप्त हैं।
* अनुच्छेद 66(3): के अनुसार उपराष्ट्रपति पद के लिए निम्न अर्हताये चाहिएं।
• वह भारत का नागरिक हो।
• वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हों।
• वह राज्य सभा के सदस्य बनाने की योग्य रखता हो।
• वह किसी भी लाभ का पद धारण न किया हों।
अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति की पदावधि।
* उपराष्ट्रपति की पदावधि पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष तक होती हैं।
*अनुच्छेद 67(1):उपराष्ट्रपति अपना त्याग पत्र हस्ताक्षर सहित राष्ट्रपति को संबोधित करके देता हैं।
*अनुच्छेद 67(2): पद से हटाने का प्रावधान - उपराष्ट्रपति , राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकता , जिस संकल्प को राज्य सभा के सभी सदस्यों ने बहुमत के साथ पारित किया हो और जिससे लोक सभा भी सहमत हों , लेकिन ऐसे प्रस्ताव को लाने से 14 दिन पूर्व उपराष्ट्रपति को इसकी सूचना देना अनिवार्य हैं।
अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति का सपथ ग्रहण।
* उप राष्ट्रपति को सपथ राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति के सम्मुख लेता हैं।
अनुच्छेद 70: के तहत राष्ट्रपति या उप - राष्ट्रपति के चुनाव संबंधित या उससे जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला अंतिम होगा।
अनुच्छेद 71: अनुच्छेद के द्वारा राष्ट्रपति को क्षमा दान की शक्ति (Power of pardon) प्राप्त हैं।
* क्षमा से आशय दण्ड से पूर्णतः मुक्ति।
* अर्थात् राष्ट्रपति किसी अपराध के सजा प्राप्त व्यक्ति को क्षमा कर सकता हैं अथवा राष्ट्रपति व्यक्ति की सजा को प्रविलंब , विराम , परिहार और लघुकरण कर सकता हैं।
प्रविलंब (Reprieve): इसमें सजा के रूप में प्राप्त मृत्युदंड को अस्थाई तौर पर रोक दिया जाता हैं।
विराम (Respite): इसमें सजा के रूप में प्राप्त दण्ड की मात्रा को किन्ही विशेष परिस्थितियों में कम कर दिया जाता हैं।
लघुकरण (Commutation): इसमें सजा के रूप में प्राप्त दण्ड के स्वरूप को बदलकर कम कर दिया जाता है। जैसे मृत्यु दण्ड की सजा को उम्रकैद में बदल देना।
परिहार (Remission): इसमें सजा के रूप में प्राप्त दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किया बिना दंड की मात्रा को कम कर दिया जाता हैं। जैसे - 20 वर्ष की कारावास को 10 वर्ष की कारावास में बदल देना।
अनुच्छेद 74: इस अनुच्छेद में यह बताया गया हैं कि राष्ट्रपति अपनी शक्ति के प्रयोग के लिऐ एक मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) का गठन करेगा , जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा। अर्थात् राष्ट्रपति ,भारत के प्रधानमंत्री सहित अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता हैं।
अनुच्छेद 75: इस अनुच्छेद के अंतर्गत भारत के महान्यायवादी (Attorney general) के पद का वर्णन किया गया हैं।
* राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करता हैं , जिसमे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता ही।
* महान्यायवादी , भारत सरकार का विधि अधिकारी (Law officer) या सर्वोच्च विधि अधिकारी होता हैं। यह सरकार को विधिक सेवाओं में सलाह देता हैं।
अनुच्छेद 79: इस अनुच्छेद में कहा गया हैं , कि भारत की संसद राष्ट्रपति , राज्यसभा और लोकसभा तीनों से मिलकर बनी हैं।
अनुच्छेद 80: इस अनुच्छेद में राज्यसभा के गठन संबंधित प्रावधान हैं।
@ राज्य सभा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य @
* इसे भारतीय संसद का उच्च सदन (Upper House) और द्वितीय सदन (Second house) कहते हैं।
* यह संसद का स्थाई सदन (Permanent house) कहते हैं , क्योंकि यह कभी भंग नहीं होती है। प्रत्येक 2 वर्ष में राज्यसभा के 1/3 सदस्य सेवानिवृत्त होते रहते हैं।
* राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता हैं।
* राज्य सभा का सदस्य बनने के लिए आयु सीमा 30 वर्ष हैं।
* राज्य सभा में राष्ट्रपति 12 सदस्यों को मनोनित (Nominated) करता हैं। ये विज्ञान (Science) , कला (art) , साहित्य (Literature) , समाजसेवा (Social service) और सहकारिता (Cooperatives) क्षेत्रों के विशेष ज्ञान व अनुभव प्राप्त व्यक्ति होते हैं।
* राज्य सभा में अधिकतम सदस्य की संख्या 250 हैं , इसमें 236 राज्यों से , 2 केंद्र शासित प्रदेशों से और 12 मनोनित सदस्य होते हैं।
* वर्तमान में राज्य सभा में कुल 245 सदस्य हैं , इसमें 233 (राज्यों से व केंद्र शासित प्रदेशों से) और 12 मनोनित सदस्य होते हैं
* उप राष्ट्रपति को राज्य सभा का पदेन सभापति माना जाता हैं।
अनुच्छेद 81: इस अनुच्छेद में लोकसभा (Lok Sabha) के गठन सम्बन्धित प्रावधान का वर्णन किया गया हैं।
@ लोक सभा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य @
* इसे भारतीय संसद का प्रथम सदन (First house) और निम्न सदन (Lower house) कहते हैं।
* यह संसद का अस्थाई सदन हैं ,क्योंकि इस भंग या विघटित किया जा सकता है।
* गणपूर्ति या कोरम के लिए लोक सभा के कुल सदस्यों का 1/10 भाग (लगभग 55 सदस्य) के सदस्य उपस्थित होने चाहिए , नहीं तो संसद नहीं चलेगी।
* लोक सभा में कुल सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 हो सकती है , जिसमे 330 सदस्य राज्यों से , 20 सदस्य केंद्र शासित और 2 मनोनित सदस्य।
* लोक सभा में राष्ट्रपति द्वारा दो मनोनित सदस्य , जो कि आंग्ल भारतीय समुदाय का नेतृत्व करते हैं। आंग्ल भारतीय से तात्पर्य जिनके माता या पिता में से कोई एक इंग्लैंड का निवासी और एक भारतीय निवासी , ऐसे व्यक्तियों की संतानों का आंग्ल भारतीय माना जाता हैं।
* वर्तमान में लोकसभा में कुल 545 सदस्य हैं। इसमें 524 सदस्य राज्यों से , 19 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से तथा 2 मनोनित सदस्य।
अनुच्छेद 85: राष्ट्रपति , संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान कर सकता हैं तथा लोक सभा को उसकी नियत अवधि से पूर्व भंग भी कर सकता हैं।
अनुच्छेद 87: इस अनुच्छेद द्वारा राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि लोकसभा के प्रत्येक आम चुनाव के पश्चात प्रथम सत्र के प्रारंभ होने और प्रत्येक नये वर्ष का प्रथम सत्र प्रारंभ होने पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को राष्ट्रपति संबोधित करेगा , जिसमें वह सरकार की नीतियों और भावी कार्यकर्मों का विवरण देता है।
अनुच्छेद 100: इस अनुच्छेद के द्वारा लोक सभा के अध्यक्ष को निर्णायक मत ( कास्टिंग मत ) देने का अधिकार दिया गया हैं।
अनुच्छेद 107: इस अनुच्छेद में सामान्य विधेयक (general bill) से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया हैं। सामान्य विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता हैं।
अनुच्छेद 108: किसी विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में मतभेद हो ,तो राष्ट्रपति ऐसे विधेयक को पास करने के लिऐ संयुक्त अधिवेशन (joint session) बुलाता हैं , लेकिन इसकी अध्यक्षता लोक सभा अध्यक्ष करता हैं।
अनुच्छेद 110: इस अनुच्छेद में धन विधेयक (Money Bill) को परिभाषित किया गया हैं।
* धन विधेयक केवल लोक सभा में तथा राष्ट्रपति की संस्तुति (अनुमति) पर प्रस्तावित किया जा सकता हैं।
* धन विधेयक के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का विशेषाधिकार लोक सभा अध्यक्ष को होता हैं।
अनुच्छेद 112: इस अनुच्छेद में वार्षिक वित्तीय विवरण (annual financial statement) का उल्लेख किया गया हैं।
* वित्त विधेयक (finance bill) को पारित कराने का प्रावधान अनुच्छेद 117 में बताया गया हैं।
अनुच्छेद 123: इस अनुच्छेद के द्वारा राष्ट्रपति को अध्यादेश (ordinance) जारी करने की शक्ति प्राप्त हैं।
* जब संसद का सत्र (session) न चल रहा हो और वर्तमान में ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो जाए , जिसमे तत्काल कार्यवाही करना अति जरूरी हो तो इस स्थिति में राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता हैं। राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश , अधिनियम की तरह प्रभावशाली व शक्ति होता हैं और संसद के पुनः सत्र प्रारंभ होने पर यह अध्यादेश 6 सप्ताह के अंदर जी अंदर दोनों सदनों द्वारा पारित हो जाना चाहिये , नही तो यह अध्यादेश समाप्त समझा जायेगा।
भाग 5 में ही अनुच्छेद 124 से 147 तक , भारत की न्यायपालिका (Judiciary) का भी वर्णन किया गया हैं।
* भारतीय संविधान में एकीकृत (Integrated) न्याय व्यवस्था का प्रावधान हैं।
* सर्वोच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट का गठन 28 जनवरी 1950 को किया गया।
* सर्वोच्च न्यायालय के भवन का डिजाइन - गणेश भीका जी कामा ने किया था।
* सर्वोच्च न्यायालय का आदर्श वाक्य - यतो धर्मस्ततो जय:
अनुच्छेद 124: में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना एवम् गठन संबंधित प्रावधान हैं।
अनुच्छेद 126: के तहत राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के किसी अन्य न्यायधीश को कार्यकारी मुख्य न्यायधीश नियुक्त कर सकता हैं।
अनुच्छेद 137: के तहत सर्वोच्च न्यायालय को पुनर्विलोकन (review) की शक्ति प्राप्त हैं।
अनुच्छेद 141: के अनुसार , सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती हैं।
अनुच्छेद 143: के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श (Consultation) लेने का अधिकार प्राप्त हैं।
भाग 5 में ही अनुच्छेद 148 से 151 तक भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India) का वर्णन किया गया है।
* भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक का कार्य सरकार के समस्त खर्चों की निगरानी करना और उनका लेखा - जोखा बनाना होता हैं। इसलिए इसे सार्वजनिक धन का संरक्षण भी कहते हैं।
अनुच्छेद 148: के अनुसार भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है । जो नियुक्ति से 6 वर्ष तक या 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक , जो पहले हो तक रह सकता हैं।
अनुच्छेद 149: में नियंत्रक व महालेखा परीक्षक के कार्यो व शक्तियों का वर्णन किया गया हैं।
👉 भाग 6 में राज्य (State) का वर्णन किया गया हैं। यह अनुच्छेद 152 से 237 तक फैला हुआ हैं।
* भाग 6 में अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य की कार्यपालिका का वर्णन हैं।
* राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख राज्यपाल होता हैं , लेकिन वास्तविक शक्ति मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं।
राज्य की कार्यपालिका में आने वाले प्रमुख पदाधिकारी -
* राज्यपाल (Governor)
* मुख्यमंत्री (Chief Minister) और उनका मंत्रिपरिषद (Council of Ministers)
* राज्य के महाधिवक्ता (advocate general of state या state attorney general)
अनुच्छेद 153: के अनुसार प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा , लेकिन सातवें संविधान संशोधन 1956 के अनुसार एक व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता हैं।
अनुच्छेद 154: में राज्यपाल के कार्यपालिका शक्तियो (Executive powers) का वर्णन किया गया है।
अनुच्छेद 155: के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति की जायेंगी।
अनुच्छेद 156: में राज्यपाल के कार्यकाल संबंधित प्रावधान का वर्णन किया गया हैं।
* राज्यपाल की नियुक्ति 5 वर्षो के लिए होती हैं , लेकिन 5 वर्ष पहले भी राष्ट्रपति को अपना त्याग पत्र देकर अपना पद छोड़ सकता हैं।
अनुच्छेद 157&158: में राज्यपाल पद के लिए योग्यता संबंधित प्रावधान का वर्णन किया गया हैं।
* वह भारत का नागरिक हो।
* वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
* किसी लाभ के पद पर न हो ।
अनुच्छेद 159: में राज्यपाल के सपथ संबंधित प्रावधान हैं।
* राज्यपाल को राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश द्वारा सपथ दिलाई जाती हैं।
अनुच्छेद 161: के तहत राज्यपाल को क्षमादान और कुछ मामलों में दंडादेश निलंबन का प्रावधान दिया गया हैं।
* राज्यपाल को मृत्युदंड क्षमा करने का अधिकार नहीं है , संघ सूची से संबंधित अपराध और सेना कोर्ट के दंडादेश को भी बदलने का अधिकार नहीं हैं।
अनुच्छेद 163: में राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए राज्य मंत्रिपरिषद की व्यवस्था की गई हैं।
अनुच्छेद 164: के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करेगा और मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेगा।
अनुच्छेद 165: में राज्य के महाधिवक्ता का वर्णन किया गया हैं।
* राज्यपाल किसी इसे व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करता हैं , जो उच्च न्यायालय का न्यायधीश नियुक्त होने की योग्य रखता हों।
* राज्य का महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता हैं।
भाग 6 में अनुच्छेद 168 से 212 तक में राज्य की विधान मंडल (Legislature) के संगठन , कार्य ,कार्यकाल और शक्ति का वर्णन किया गया हैं।
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