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स्थलमंडल(Lithosphere)

📒स्थलमंडल(लिथोस्फेयर):- पृथ्वी की बाहरी सतह पर स्थित स्थल भू -भाग को स्थलमंडल कहते हैं। पृथ्वी के 29% भू - भाग पर स्थलमंडल तथा 71% भाग पर जलमंडल हैं।

(स्थलमंडल)


चट्टान(Rock) क्या है?

पृथ्वी के भू -पटल (crust) पर स्थित सबसे कठोरतम भाग को चट्टान कहते है। निर्माण प्रक्रिया के अनुसार चट्टान को तीन वर्गों में बांटा जाता है।

1.आग्नेय चट्टान (Igneous rock)

2.अवसादी चट्टान (Sedimentary rock)

3. रूपांतरित चट्टान(Metamorphic rock)

आग्नेय चट्टान (इग्नियस रॉक) :-  इस चट्टान का  निर्माण मैग्मा या लावा के जमाने के कारण होता हैं। इसे प्राथमिक चट्टान भी कहते हैं,क्योंकि पृथ्वी की उत्पत्ति के प्रश्चात सर्वप्रथम इनका ही निर्माण हुआ था।

आग्नेय चट्टाने दो प्रकार की होती हैं।

1. अंत: निर्मित आग्नेय चट्टान - इनका निर्माण लावा और मैग्मा आदि के पृथ्वी के नीचे ठंडा होने से होता है। जैसे - बैथोलिक ,फैकोलिथ , लेपोलिथ , सिल , तथा डाइक आदि चट्टाने बनती हैं।

2. बाह्य आग्नेय चट्टाने - जब लावा और मैग्मा धरातल के ऊपर जम जमाते है तो ऐसी चट्टानों का निर्माण होता हैं।

 ✍️ इस चट्टान में परत और जीवाश्म नही पाए जाते हैं।      

       आग्नेय चट्टाने ----------------------- रूपांतरिक रूप 

           ग्रेनाइट                                     नीस

           बेसाल्ट                                   सिस्ट

         बिटुमिनास कोयला                     ग्रेफाइट

अवसादी चट्टान (सेंडिमेंट्री रॉक):-  जब चट्टानो के छोटे -छोटे टुकड़े एक स्थान पर प्राकृतिक कारकों (जैसे वायु से) के द्वारा के परत के रूप में एकत्र होते रहते हैं,तो निचली परतों में दाब व ताप के कारण रासायनिक क्रियाएं होती हैं। जिससे ये परते कठोर चट्टानों का रूप ले लेती हैं। ऐसी चट्टाने अवसादी चट्टान होती है।

✍️इस चट्टान में परत और जीवाश्म पाए जाते हैं।

✍️ बलुआ पत्थर नमक अवसादी चट्टान से ही आगरा का लाल किला और दिल्ली का लाल किला को बनाया गया हैं।

   अवसादी चट्टान --------------- रूपांतरित रूप

       बलुआ पत्थर                                 क्वार्टजाइट 

        चुना - पत्थर                                  संगमरमर 

       लिग्नाइट कोयला                            एंथोसाइड

रूपांतरित चट्टान (Metamorphic rock):-   आग्नेय व अवसादी चट्टान में ताप व दाब के परिवर्तन के परिणाम स्वरूप रूपांतरित चट्टानों का निर्माण होता हैं। कभी - कभी रूपांतरित चट्टानों का पुन: रूपांतरित चट्टानों में ही रूपांतरण होता हैं तो इसे अति रूपांतरण(Intense metamorphosim) कहते हैं।

✍ अन्य नाम - कायांतरित चट्टान

  रुपांतरित चट्टान  -------------  पुन: रूपांतरित रूप

         स्लेट                                       फाइलाइट


       फाइलाइट                                  सिस्ट

📒पृथ्वी के सतह पर स्थित स्थलमंडल में स्थल की आकृति कैसी-कैसी होती हैं(How are the shape of the site in the lithosphere located on the surface of the Earth.) 

पृथ्वी का प्रत्येक स्थान एक समान नहीं है , कुछ भाग बहुत ऊबड़ - खाबड़ है और समुंद्र तल से कई हजार मीटर ऊंचाई पर है। इसके विपरित कुछ भाग समुंद्र तल से ज्यादा ऊंचे नही है। स्थल के इन भागों को अलग - अलग नामों से जाना जाता है। जैसे पर्वत , पठार , मैदान आदि ये धरातल की प्रमुख अकृतियां है । कुछ अन्य आकृतियां भी है ,जो निम्नलिखित हैं।

(a) नदियों के अपरदन से बनीं स्थलाकृति

(b) पवन द्वारा निर्मित स्थलाकृति

(c) सागरीय जल द्वारा निर्मित स्थलाकृति


📒पर्वत(Mountains) किसे कहते हैं?

पर्वत धरातल के ऐसे ऊपर उठें भाग को कहते हैं,जिनका शिखर भाग संकुचित क्षेत्र वाला होता है और ढाल तीव्र हो। जिसकी ऊंचाई 1000 मीटर से अधिक होती हैं। उसे पर्वत कहते हैं। पृथ्वी के 24% भाग पर पर्वत का विस्तर हैं।

पर्वत से सबंधित प्रमुख शब्दावलीय ---

पहाड़ी(hill): इनको पर्वतों का लघु रूप कहा जाता हैं,क्योंकि ये पर्वत के समान विशेषता वाले होते है । केवल इनकी ऊंचाई 1000 मीटर से कम होती हैं।


पर्वत कटक(Cuttack) : संकीर्ण(Narrow) एवम् ऊंची पहाड़ियों के क्रमबद्ध स्वरूप को पर्वत कटक कहा जाता हैं।

पर्वत श्रेणी(Mountain range): पहाड़ों व पहाड़ियों का ऐसा क्रम जिसमे कई शिखर,कटक, घाटियां आदि सम्मिलित हो 'पर्वत श्रेणी' के नाम से जानी जाती हैं। पर्वत श्रेणियां लगभग एक सीधी रेखा में विस्तृत होती है। हिमालय पर्वत श्रेणी इसका एक प्रमुख उदाहरण है।

पर्वत श्रृंखलाये(Mountain ranges) :- विभिन्न कालों में निर्मित लम्बे एवम् संकरे पर्वतों का समानांतर विस्तार पर्वत श्रृंखला या पर्वतमाला कहलाता हैं। जैसे एप्लेशियान पर्वतमाला, रॉकी पर्वतमाला आदि।

पर्वत तंत्र(Mountain system) : पर्वत भी विभिन्न पर्वत श्रेणियों का समूह होता है, किन्तु पर्वत श्रृंखला के विपरित इसमें एक ही युग की में निर्मित पर्वतों को शामिल किया जाता हैं। एप्लेशियान इसका एक प्रमुख उदाहरण हैं।

पर्वत वर्ग :- जब पर्वतों का समूह एक गोलाकार रूप में विस्तृत होता हैं तथा उसकी श्रेणियां एवम् कटक आसमान रूप में विस्तृत होते हैं, तब उसे पर्वत वर्ग कहते हैं।

पर्वत समूह या कार्डिलेरा( Mountain group or cardillera): जब विभिन्न युगों में निर्मित पर्वतों पर्वत श्रेणियां,पर्वत श्रृंखला और पर्वत तंत्र एक साथ ही बिना किसी क्रम में फैले हो तो उन्हें कार्डिलेरा या पर्वत समूह कहा जाता हैं। उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के प्रशांत तटीय भाग में स्थित 'प्रशांत कार्डिलेरा' पर्वत समूह का प्रमुख उदाहरण हैं।

पर्वतों के अलग - अलग विशेषताओं के कारण पर्वतों के निम्न प्रकार होते हैं।

1. आयु के आधार पर पर्वत के प्रकार

(a) प्राचीन पर्वत(Ancient mountains)

(b) नवीन पर्वत(New mountain)

2. उत्पत्ति के आधार पर पर्वतों के प्रकार 

(a) वलित या मोडदार पर्वत(Fold mountain)

(b) ब्लाक/अवरोधी/भ्रंस पर्वत(Block Mountain)

3. ज्वालामुखी पर्वत(Volcanic Mountains)

4. अवशिष्ट पर्वत(Residual mountain)

5. संचित पर्वत(Accumulated mountain)

प्राचीन पर्वत(Ancient mountains):-  जिनका निर्माण 3 करोड़ वर्ष पहले, महाद्वीपीय विस्थापन युग से पहले हुआ था । जैसे बनाइन (यूरोप), एप्लेशियान(नॉर्थ अमेरिका) ,अरावली (भारत) आदि।

नवीन पर्वत(New mountain) :-  जो पर्वत तृतीयक युग में प्लेटों के अभिक्षरण से निर्मित है ,उन्हे नवीन पर्वत कहते हैं। जैसे - हिमालय रॉकी, एंडीज , अल्पस आदि।

वलित या मोडदार पर्वत(Fold mountain) :-  पृथ्वी की निवर्तनीय शक्तियां जैसे - दबाव , सम्पीडन , उभार आदि के कारण चट्टानों के स्तर में व्यापक अंतर या मोड़ आ जाने से ऐसे पर्वतों की उत्पत्ति होती हैं।

ब्लाक/अवरोधी/भ्रंस पर्वत(Block Mountain) :-  पृथ्वी के धरातलीय भागों में किसी कारण से दरार या भ्रांस  से धरातल का कुछ भाग ऊपर उठ जाता है और कुछ भाग नीचे धंस जाता हैं। ऊपर उठें भाग को ब्लाक पर्वत और नीचे धंसे भाग को रिफ्ट घाटी की संज्ञा दी जाती हैं। जैसे - ब्लैक फारेस्ट , विंध्याचल व सतपुर्णा(भारत) आदि।

ज्वालामुखी पर्वत(Volcanic Mountains) :-  इसका निर्माण ज्वालामुखी उदगार से निकलने वाले तरल पदार्थ ,लावा आदि के जमाव से होता हैं। इसकी आकृति शंकुनुमा होती हैं। इसका सबसे ऊपरी भाग किपनुमा गढ्ढा होता हैं , जो क्रेटर कहलाता हैं। जैसे - फियुजियामा (जापान) , विषुवियश पर्वत ( इटली) , चिंबोराजो पर्वत (किटोपैक्सी) आदि।

अवशिष्ट पर्वत(Residual mountain) : -  ऐसे पर्वत ,जो पुराने होते है और उन पर अपक्षय व अपरदन क्रियाओं के करण उनका अपघटन होता रहता हैं , अवष्ठित पर्वत कहलाते हैं। जैसे अरावली (भारत में),सियारा आदि।

संचित पर्वत(Accumulated mountain) :-  भूपटल पर मिट्टी , बालू , कंकर , पत्थर आदि के एक स्थान पर जमा होते , रहने के कारण इन पर्वतों का निर्माण होता हैं। जैसे - रेगिस्तान में बनने वाले बालू के स्तूप इसी श्रेणी में आते हैं।

🖋️ विश्व के प्रमुख पर्वत श्रेणियां,स्थिति , सर्वोच्च बिंदु और इसकी ऊंचाई।

रॉकी पर्वत श्रेणी :- यह उत्तरी महाद्वीप में स्थित हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी माउंट एल्बर्ट है।

एंडीज पर्वत श्रेणी :- यह दक्षिणा अमेरिका महाद्वीप में स्थित हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी एकांकागुआ है।

अलास्का पर्वत श्रेणी :- यह उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप में स्थित हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी माउंट मैकिंले है।

यूराल पर्वत श्रेणी :- यह मध्य रूस में हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी गोरा नैरोडनाया हैं।

आल्प्स पर्वत श्रेणी :- यह मध्य यूरोप में हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी माउंट ब्लैक हैं।

बर्खोयांग पर्वत श्रेणी :- यह पूर्वी रूस में हैं। इसकी सबसे ऊंची चोटी गौर मास खाय हैं।

काकेशस पर्वत श्रेणी :- इस पर्वत श्रेणी में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुश हैं।

ग्रेट डिवाइड रेंज :- यह आस्ट्रेलिया महाद्वीप में स्थित हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी कोस्युस्को है।

एटलस पर्वत श्रेणी :- यह अफ्रीका महाद्वीप में स्थित हैं।इसकी सर्वोच्च चोटी किलिमंजारो हैं।

हिमालय पर्वत श्रेणी:- यह एशिया महाद्वीप में स्थित हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट है ,जिसकी ऊंचाई पहले 8848 मीटर थी, लेकिन वर्तमान में प्राप्त साक्ष्य के आधार पर इसकी ऊंचाई 8850 मीटर हैं।

📒पठार(Plateau) किसे कहते हैं?

पृथ्वी के धरातल पर स्थित ,वह स्थल भाग जो अपने आस - पास के क्षेत्रों से पर्याप्त ऊंचा हो और जिसका शीर्ष भाग चौड़ा या सपाट हो पठार कहलाते हैं।

✍️समुंद्र तल के नीचे के पठरो को रिज कटक कहते हैं।

🖋️पठार की अलग - अलग विशेषताओं के कारण इनको निम्न में बांटा जा सकता हैं।

1. स्थिति के आधार पर पठरो के प्रकार

(a) अंत:पर्वती पठार 

(b) महाद्वीपीय पठार 

(c)पर्वत पदिय पठार 

2. आकृति के आधार पर पठार के प्रकार 

(a) गुंबदाकार पठार 

(b) पुन:निर्मित पठार 

3. जलवायु के आधार पर पठारो के प्रकार 

(a)शुष्क पठार 

(b) आर्द्र पठार

(c) हिम पठार 

अंत:पर्वती पठार :- पर्वतमालाओं के बीच बने पठार को अंत:पर्वती पठार कहते हैं। जैसे - मैक्सिको का पठार, बोलोविया का पठार,तिब्बत का पठार आदि।

महाद्वीपीय पठार :- मैदान या समुंद्र से घिरे पठार को महाद्वीपीय पठार कहते हैं। जैसे - ब्राजील का पठार, दक्षिण भारत का पठार आदि।

पर्वत पदिय पठार:- ऐसे पठार , जिनके एक ओर पर्वत तथा दूसरी ओर मैदान या समुंद्र होता है। जैसे - पेंटागोनिया का पठार(अर्जेंटीना) , मालवा का पठार(भारत) आदि। 

पुनरयुवित पठार :- पठार की जीर्ण अवस्था(पुरानी अवस्था) की प्राप्ति के बाद भी यदि पठार में पुन: उभार(बढ़ता) आता है। जैसे - मिसौरी का पठार( उत्तरी अमेरिका) , रांची का पठार (भारत) आदि।

गुंबदाकार पठार: - जैसे- छोटा नाग का पठार (भारत)

शुष्क पठार: - जैसे- पुटवारा का पठार

आर्द्र पठार :-जैसे- असम का पठार

हिम पठार :- जैसे- ग्रीनलैंड का पठार 

👉पठारो से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य(Important facts related to the plateau)

 ✍️ विश्व का सबसे ऊंचा पठार पामीर का पठार (तिब्बत में) है। यह सागर तल से लगभग 5000 मीटर ऊंचा है। इसे विश्व की छत कहते हैं।

✍️ कोलंबिया के पठार को स्नैक्स पठार भी कहते हैं।

📒मैदान(plain) किसे कहते हैं?

पृथ्वी पर अपेक्षाकृत समतल, एकदम न्यून ढाल वाले स्थल को मैदान कहा जाता हैं।इन मैदानों का निर्माण नदियों द्वारा लाए , गाये अवक्षेपो के कारण होता हैं।

👉 विश्व के प्रमुख मैदान(Major plains of the world)

ग्रेट प्लेन का मैदान ------- कनाडा तथा U.S.A.

अमेजन का मैदान ------- दक्षिणी अमेरिका 

पेटागोनिया का मैदान -------दक्षिणी अमेरिका 

पम्पास का मैदान -------दक्षिणी अमेरिका 

द . साइबेरिया का मैदान ------- यूरोप तथा एशिया

सहारा का मैदान ------- अफ्रीका

नील नदी का मैदान ------- मिस्त्र (अफ्रीका)

मालागासी का मैदान ------- मालागासी

गंगा - यमुना का मैदान ------- भारत 

सिन्धु का मैदान ------- भारत - पाकिस्तान

ब्रह्मपुत्र का मैदान ------- भारत - बंग्लादेश

अरब का वृहत मैदान ------- सऊदी अरब 

📒नदियों के जल के द्वारा अपरदन क्रिया से निम्नलिखित अकृतियो का निर्माण होता हैं।

'V' आकार की घाटी , गार्ज , कैनियन , जल प्रपात , जल गर्तिका , नदी विपर्स , गोमुख झील , डेल्टा आदि।

V' आकार की घाटी:- जब नदियां अपनी युवावस्था में तली को काटकर उसे गहरा करती है और नदी के आस - पास की घाटी का आकार अंग्रेजी अक्षर के 'V' आकार का हो जाता हैं।

गार्ज और कैनियन :- जब नदी V' आकार की घाटी और गहरी हो जाती हैं तो उसे गार्ज कहते है । गार्ज का विस्तृत रूप को कैनियन कहते हैं।

जल प्रपात :- जब नदियां ऊंचाई पर स्थित चट्टानी भाग से नीचे गिरती हैं तो उसे जल प्रपात कहते हैं।

जल गर्तिका:- जब नदी का जल चक्करदार भावरो के कारण जल घर्षण से नदी में ही बेलनाकार गर्तों का निर्माण करती है उसे जल गर्तिकाए कहते हैं।

नदी विपर्स:- जब नदी का आकार इस ओम्स सिंबल( Ω) जैसा हो जाता हैं तो नदी के इस रूप को नदी विपर्स कहते है।

गोमुख झील :- जब नदी विसर्प को त्याग कर सीधे मार्ग में बहनें लगती है तो विसर्प के शेष बचे क्षेत्र में एक झील का निर्माण होता है। जिसकी आकृति लगभग गाय के खुर के समान होती हैं जिसके कारण से गोखुर झील कहा जाता हैं।


डेल्टा:-  नदी के मुहाने पर उसके द्वारा लाए गए अवसादो के निक्षेपण के परिणाम स्वरूप नदी की धारा अनेक शाखाओं में विभक्त होकर बहती हैं। यह आकृति प्राय: त्रिभुजाकार होती है,इस कारण इसका नाम डेल्टा रखा गया।
डेल्टा निम्नलिखित प्रकार के होते हैं।
चपाकार डेल्टा (Arcuate Delta):- त्रिभुजाकार आकृति वाले डेल्टा को इस नाम से जाना जाता हैं। जैसे - नील, गंगा ,नाइजर आदि नदियों का डेल्टा 
ज्वारनदमुखी डेल्टा :- जब कोई नदी अपने मुहाने पर निक्षेप को एकत्र करती हैं, लेकिन समुद्र आये ज्वार से यह निक्षेप समाप्त हो जाता हैं। ऐसे डेल्टा को ज्वारनदमुखी डेल्टा कहते हैं। जैसे - हडसन, सीन, ओब, मैकेजी आदि नदियां
परित्याग डेल्टा :- जब किसी नदी द्वारा पहले से निर्मित डेल्टा छोड़कर अन्य किसी स्थान पर नए डेल्टा निर्माण करती हैं तो ऐसा डेल्टा परित्याग डेल्टा कहलाता है। जैसे - ह्वंगहो नदी का डेल्टा ।
एस्चूअरी :- जब किसी नदी का मुहाना हमेशा जलमग्न रहता है और समुंद्री जल धाराओं द्वारा नदी के निक्षेप को हमेशा बहा ले जाती है। जिससे डेल्टा का निर्माण नहीं हो पाता है। इस घटना को एस्चूअरी कहते हैं। जैसे:- नर्मदा और ताप्ती डेल्टा न बनाकर एस्चूअरी बनती हैं।
विशेष topic:::
घास का मैदान(field of grass)
✍️अफ्रीका की घासों को सवाना कहा जाता हैं। सवाना को विश्व का चिड़िया घर भी कहते हैं।
✍️USA व कनाडा की घासों को प्रेयरीज कहते हैं।
✍️अर्जेंटीना की घासों को पंपास कहा जाता हैं।
✍️दक्षिणी अफ्रीका की घासों को वेल्ड कहा जाता हैं।


📒पवन द्वारा निम्नलिखित स्थलाकृति का निर्माण होता हैं। 
ज्यूजेन : मरुस्थलों में जहां पर कठोर और मुलायम शैलों की परतों के शैल पिण्ड होते हैं , वहां पर असाधरण और अनियमित अपरदन के कारण ढक्कनदार दवात जैसी अनेक आकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं । इसी को ज्यूजेन कहा जाता है।

लोयस: मरुस्थलों से महीन बालू के कणों को उड़ाकर पवन जब पास के ही मैदान क्षेत्र में निक्षेप करती हैं,तो उनके निक्षेपण से बने मैदान को लोयस मैदान कहा जाता हैं।

इन्सेलबर्ग : मरुस्थलों में शैलों के अपक्षय तथा अपरदन के कारण कोमल शैल आसानी से कट जाती है परन्तु कठोर शैल के अवशेष भाग ऊंचे - ऊंचे टीलों के रूप में बच जाते हैं । इस तरह के टापुओं को इन्सेलवर्ग कहा जाता है ।

📒सागरीय जल द्वारा बनी प्रमुख स्थलाकृति
 पुलिन :- सागरीय तट के सहारे मलवा के निक्षेप से बने स्थल 
रूप को पुलिन कहा जाता हैं।
लैगून:- सागरीय निक्षेपण पदार्थ से जब समुद्र तट पर सागरीय जल बंद हो जाता हैं। तो इसे लैगून कहते हैं

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